Friday, March 5, 2010
To the Failed
एक अँधेरा लाख सितारे ,
एक निराशा लाख सहारे |
सबसे बड़ी सौगात है जीवन ,
नादान है जो जीवन से हारे |
दुनिया की यह बगिया ऐसी
जितने कांटे फूल भी उतने,
दामन मे ख़ुद आ जायेंगे
जिनकी तरफ़ तू हाथ पसारे |
बीते हुए कल की खातिर तू
आने वाला कल मत खोना,
जाने कौन कहाँ से आकर
राहें तेरी फ़िर से संवारे |
दुःख से अगर पहचान न हो तो,
कैसा सुख और कैसी खुशियाँ,
तूफानों से लड़कर ही तो
लगते हैं साहिल कितने प्यारे |
एक अँधेरा लाख सितारे,
एक निराशा लाख सहारे,
सबसे बड़ी सौगात है जीवन ,
नादान है जो जीवन से हारे ||
- इन्दीवर
Sunday, February 28, 2010
તારા ભણી મને મુક્ત રાખજે
- રવીન્દ્રનાથ ઠાકુર
Thanks: Aha! Zindagi magazine
Saturday, February 20, 2010
A Father's letter to his Daughter
"Happy Birthday.
When you were two years old, I wish I could have kissed you good night.
At five, I wish I could have taken you to your first day of school.
Six, I wish I could have been there to teach you to play piano.
13, I wish I could have told you not to chase some boy. I wish I could have held you when you had a broken heart.
I wish I could have been a good father. Nothing I ever did will replace that.
For what it’s worth, it’s never too late or, in my case, too early to be whoever you want to be.
There’s no time limit. Start whenever you want.
You can change or stay the same, there are no rules to this thing.
We can make the best or the worst of it. I hope you make the best of it.
And I hope you see things that startle you.
I hope you feel things you never felt before.
I hope you meet people with a different point of view.
I hope you live a life you’re proud of. If you find that you’re not, I hope you have the strength to start all over again."
Monday, January 25, 2010
પડશે એવા દેવાશે
Monday, August 31, 2009
Do It Anyway!
Thursday, December 25, 2008
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है,
यहाँ तक की घास के हिलने का भी,
हवा का खिड़की से आने का,
और धूप का दीवार पर
चढ़कर चले जाने का।
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे लगा है
कि हम असमर्थताओं से नहीं
सम्भावनाओं से घिरे हैं,
हर दिवार में द्वार बन सकता है
और हर द्वार से पूरा का पूरा
पहाड़ गुज़र सकता है।
शक्ति अगर सीमित है
तो हर चीज़ अशक्त भी है,
भुजाएँ अगर छोटी हैं,
तो सागर भी सिमटा हुआ है,
सामर्थ्य केवल इच्छा का दूसरा नाम है,
जीवन और मृत्यु के बीच जो भूमि है
वह नियति की नहीं मेरी है।
- सर्वेश्वरदयाल सकसेना
Thursday, December 18, 2008
કહો, તમે જુવાન છો ?
શું કાંઈ કામ મળતું નથી ? અરે, કામની ક્યાં કમી છે ?
પાંચ માઈલ દોડી નાખો જોઈએ !
કોદાળી ઉઠાવો ને ધરતી ખોદી નાખો.
કુહાડી ઉઠાવો ને સાંજ સુધીમાં
પાંચ મણ લાકડાં કાપી લાવો !
એ ન કરી શકો તો ઘેર ઘેર ફરીને બીમારોને જુઓ,
જેનું કોઈ ન હોય તેને કાંઈક ઉપયોગી થાવ.
તમારી ઉંમર કેટલી ? સોળ વરસ ?
સોળ વરસનો નવજુવાન બાપકમાઈ પર જીવે ?
છોડો એ સહારો, ને લાગી જાવ કામે !
દિવસ આખો મંડ્યા રહો.
સાંજ પડશે ત્યારે સમજાશે કે એમાં કેવી મોજ છે !
બાળપણનાં સ્વપ્નાં યાદ આવે છે ?
તે વેળા શા શા ઉમંગો આવતા હતા ?
પહાડો ચડવાના ? જંગલો ઘૂમવાના ?
તો ત્યારે કેમ નીકળી પડ્યા નહીં ?
માબાપનો ડર હતો ત્યારે ? પણ આજે કોનો ડર છે ?
ભાઈબહેનોનો ? સગાંસ્નેહીઓનો ?
એવા ડર તો કમબખ્ત મરતાં લગી પજવવાના.
ભાઈબહેન પછી પત્નીનો, પછી બાળબચ્ચાંનો,
ને એમ કરતાં કરતાં કોણ જાણે કેટલાંયનો.
ફેંકી દો એ ડરને !
જેને તરવું છે એને તો ડર છોડીને
એક વાર ઝંપલાવવું જ પડે છે.
બચપણમાં તમારું અંતર જે જે સ્વપ્નાં ઘડતું હતું,
તે સાચાં પાડવા હવે કટિબદ્ધ થઈ જાવ !
-ભગવાનદીન
Friday, December 12, 2008
हम करें राष्ट आराधन
हम करें राष्ट आराधन
तन से मन से धन से
तन मन धन जीवनसे
हम करें राष्ट आराधन………………। 0 ।
अन्तर से मुख से कृती से
निश्र्चल हो निर्मल मति से
श्रध्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट अभिवादन…………………। १ ।
अपने हंसते शैशव से
अपने खिलते यौवन से
प्रौढता पूर्ण जीवन से
हम करें राष्ट का अर्चन……………………। २ ।
अपने अतीत को पढकर
अपना ईतिहास उलटकर
अपना भवितव्य समझकर
हम करें राष्ट का चिंतन…।………………। ३ ।
है याद हमें युग युग की जलती अनेक घटनायें
जो मां के सेवा पथ पर आई बनकर विपदायें
हमने अभिषेक किया था जननी का अरिशोणित से
हमने शृंगार किया था माता का अरिमुंडो से
हमने ही ऊसे दिया था सांस्कृतिक उच्च सिंहासन
मां जिस पर बैठी सुख से करती थी जग का शासन
अब काल चक्र की गति से वह टूट गया सिंहासन
अपना तन मन धन देकर हम करें पुन: संस्थापन………। ४ ।
अरिशोणित = blood of enemies
अरिमुंडो से = with heads of enemies
Saturday, October 11, 2008
साँसों के मुसाफ़िर
इसको भी अपनाता चल,
उसको भी अपनाता चल,
राही हैं सब एक डगर के, सब पर प्यार लुटाता चल।
बिना प्यार के चले न कोई, आँधी हो या पानी हो,
नई उमर की चुनरी हो या कमरी फटी पुरानी हो,
तपे प्रेम के लिए, धरिनी, जले प्रेम के लिए दिया,
कौन हृदय है नहीं प्यार की जिसने की दरबानी हो,
तट-तट रास रचाता चल,
पनघट-पनघट गाता चल,
प्यासी है हर गागर दृग का गंगाजल छलकाता चल।
राही हैं सब एक डगर के सब पर प्यार लुटाता चल।
कोई नहीं पराया, सारी धरती एक बसेरा है,
इसका खेमा पश्चिम में तो उसका पूरब डेरा है,
श्वेत बरन या श्याम बरन हो सुन्दर या कि असुन्दर हो,
सभी मछरियाँ एक ताल की क्या मेरा क्या तेरा है?
गलियाँ गाँव गुँजाता चल,
पथ-पथ फूल बिछाता चल,
हर दरवाज़ा राम दुआरा सबको शीश झुकाता चल।
राही हैं सब एक डगर के सब पर प्यार लुटाता चल।
हृदय हृदय के बीच खाइयाँ, लहू बिछा मैदानों में,
धूम रहे हैं युद्ध सड़क पर, शान्ति छिपी शमशानों में,
जंज़ीरें कट गई, मगर आज़ाद नहीं इन्सान अभी
दुनिया भर की खुशी कैद है चाँदी जड़े मकानों में,
सोई किरन जगाता चल,
रूठी सुबह मनाता चल,
प्यार नकाबों में न बन्द हो हर घूँघट खिसकाता चल।
राही हैं सब एक डगर के, सब पर प्यार लुटाता चल।
Friday, August 29, 2008
If—
If you can keep your head when all about you
Are losing theirs and blaming it on you;
If you can trust yourself when all men doubt you,
But make allowance for their doubting too:
If you can wait and not be tired by waiting,
Or being lied about, don’t deal in lies,
Or being hated, don’t give way to hating,
And yet don’t look too good, nor talk too wise;
If you can dream—and not make dreams your master;
If you can think—and not make thoughts your aim,
If you can meet with Triumph and Disaster
And treat those two imposters just the same:
If you can bear to hear the truth you’ve spoken
Twisted by knaves to make a trap for fools,
Or watch the things you gave your life to, broken,
And stoop and build ’em up with worn-out tools;
If you can make one heap of all your winnings
And risk it on one turn of pitch-and-toss,
And lose, and start again at your beginnings
And never breathe a word about your loss:
If you can force your heart and nerve and sinew
To serve your turn long after they are gone,
And so hold on when there is nothing in you
Except the Will which says to them: "Hold on!"
If you can talk with crowds and keep your virtue,
Or walk with Kings—nor lose the common touch,
If neither foes nor loving friends can hurt you,
If all men count with you, but none too much:
If you can fill the unforgiving minute
With sixty seconds’ worth of distance run,
Yours is the Earth and everything that’s in it,
And—which is more—you’ll be a Man, my son!
-Rudyard Kipling
Wednesday, August 27, 2008
उदास न हो
मेरे नदीम मेरे हमसफर, उदास न हो।
कठिन सही तेरी मंज़िल, मगर उदास न हो।
कदम कदम पे चट्टानें खड़ी रहें, लेकिन
जो चल निकलते हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते।
हवाएँ कितना भी टकराएँ आंधियाँ बनकर,
मगर घटाओं के परछम कभी नहीं झुकते।
मेरे नदीम मेरे हमसफर .....
हर एक तलाश के रास्ते में मुश्किलें हैं, मगर
हर एक तलाश मुरादों के रंग लाती है।
हज़ारों चांद सितारों का खून होता है
तब एक सुबह फिज़ाओं पे मुस्कुराती है।
मेरे नदीम मेरे हमसफर ....
जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते
वो ज़िन्दगी में नया रंग ला नहीं सकते।
जो रास्ते के अन्धेरों से हार जाते हैं
वो मंज़िलों के उजालों को पा नहीं सकते।
मेरे नदीम मेरे हमसफर, उदास न हो।
कठिन सही तेरी मंज़िल, मगर उदास न हो।
- साहिर लुधियानवी
एक आशीर्वाद
जा तेरे स्वप्न बड़े हों।
भावना की गोद से उतर कर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें।
चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये
रूठना मचलना सीखें।
हँसें
मुस्कुराऐं
गाऐं।
हर दीये की रोशनी देखकर ललचायें
उँगली जलायें।
अपने पाँव पर खड़े हों।
जा तेरे स्वप्न बड़े हों।
- दुष्यन्त कुमार
Monday, July 28, 2008
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
- हरिवंशराय 'बच्चन'
Tuesday, April 1, 2008
जीवन नहीं मरा करता है
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है
सपना क्या है, नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों
कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है
माला बिखर गयी तो क्या है
खुद ही हल हो गयी समस्या
आँसू गर नीलाम हुए तो
समझो पूरी हुई तपस्या
रूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज़ सिलाने वालों
कुछ दीपों के बुझ जाने से, आँगन नहीं मरा करता है
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर
केवल जिल्द बदलती पोथी
जैसे रात उतार चाँदनी
पहने सुबह धूप की धोती
वस्त्र बदलकर आने वालों! चाल बदलकर जाने वालों!
चन्द खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
लाखों बार गगरियाँ फूटीं,
शिकन न आई पनघट पर,
लाखों बार किश्तियाँ डूबीं,
चहल-पहल वो ही है तट पर,
तम की उमर बढ़ाने वालों! लौ की आयु घटाने वालों!
लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गन्ध फूल की,
तूफानों तक ने छेड़ा पर,
खिड़की बन्द न हुई धूल की,
नफरत गले लगाने वालों! सब पर धूल उड़ाने वालों!
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है !
- 'नीरज'
Sunday, August 12, 2007
नौजवानों
हे नौजवानों हे विद्यार्थियों,
मुसकुराकर अपने कदम को बढ़ाओ,
मत हो हताश, आलस में न दिन बिताओ,
अपने में छिपी हुई शक्ति को पहचानना है,
सही इस्तेमाल कर उसे व्यर्थ न गँवाना है।
इस जीवन में उठाने है तुम्हें महत्वपूर्ण कदम,
सोच समझकर करो फैसला, बहक न जाए कदम,
अपनी ज़िंदगी को तुम्हें खुद सँवारना है,
काँटों से भरे रास्तों को फूलों से भरना है।
हर मुमकिन ख़्वाबों को हक़ीक़त में बदलना है,
अच्छे काम कर सब के होंठों पर मुस्कुराहट लाना है,
तुम्हें इस देश को उस बुलंदी तक ले जाना है,
देख जिसे पूरा संसार ईर्ष्या से जल उठे।
तो नौजवानों देर किस बात की
आत्मविश्वास के साथ जुट जाओ।
यह देश है हमारी धरोहर
इसकी रक्षा के लिए तैयार हो जाओ।
माता-पिता, गुरुजनों की तुम पर है टिकी आस,
नहीं डरो किसी से, तुम पर हम सबको है विश्वास।
- राजश्री
Wednesday, August 1, 2007
તું નાનો, હું મોટો
તું નાનો, હું મોટો -
એવો ખ્યાલ જગતનો ખોટો ;
આ નાનો, આ મોટો -
એવો મૂરખ કરતા ગોટો.
ખારા જળનો દરિયો ભરિયો,
મીઠા જળનો લોટો ;
તરસ્યાને તો દરિયાથીયે
લોટો લાગે મોટો.
નાના છોડે મહેકી ઊઠે
કેવો ગુલાબગોટો !
ઊંચા ઊંચા ઝાડે તમને
જડશે એનો જોટો ?
મન નાનું તે નાનો,
જેનું મન મોટું તે મોટો.
- પ્રેમશંકર ન. ભટ્ટ
મન ન માને એ જગાઓ પર જવાનું છોડીએ,
કોઈના દરબારમાં હાજર થવાનું છોડીએ.
હોય જો તાકાત તો બે-ત્રણ હલેસાં મારીએ,
જળને વ્હેવાની રસમ શિખવાડવાનું છોડીએ.
કંઠને શોભે તો શોભે માત્ર પોતાનો અવાજ,
પારકી રૂપાળી કંઠી બાંધવાનું છોડીએ.
કોઈ દુર્ગમ પથ ઉપર તૂટેલી ભેખડ કાં બનો?
છોડીએ તો એક સીમાચિહ્ન નાનું છોડીએ.
- હેમેન શાહ
આપણે ભરોસે આપણે હાલીએ
હો ભેરુ મારા, આપણે ભરોસે આપણે હાલીએ…
બળને બાહુમાં ભરી, હૈયામાં હામ ધરી,
સાગર મોઝારે ઝુકાવીએ;
આપણા વહાણનાં સઢ ને સુકાનને
આપણે જ હાથે સંભાળીએ.
કોણ રે ડુબાડે વળી કોણ રે ઉગારે,
કોણ લઇ જાય સામે પાર ?
એનો કરવૈયો કો’ આપણી બહાર નહીં,
આપણે જ આપણે છઇએ !
હો ભેરુ મારા, આપણે ભરોસે આપણે હાલીએ.
- પ્રહલાદ પારેખ
ભય અમારે કોનો જગમાં ?
ભય અમારે કોનો ?
લુચ્ચા બુઢ્ઢા ચોરલૂંટારા
અમને શું કરવાના ?
સીધુંસાદું જીવન જ્યાં હો
શીદને અમ ડરવાના ?
ભય અમારે કોનો જગમાં ?
ભય અમારે કોનો ?
નહિ કપટ, ન ઝોળી થેલી,
મતા અમારી શી ?
લૂંટી શકે ના લગન અમારી
ધૂન તદ્દન પાગલ શી !
ભય અમારે કોનો જગમાં ?
ભય અમારે કોનો ?
ખપે નહિ આરામ અમોને,
ખપે ન યશ કે નામ;
ખપે નહિ વિરામ અમોને,
સદા લગન – બસ, કામ !
ભય અમારે કોનો જગમાં ?
ભય અમારે કોનો ?
ચડતી-પડતી સમાન અમને,
છો હાર જીવન કે જીત;
જીવન જોગવવું જ લગનમાં,
ધ્યેયમગન થઈ નિત !
ભય પછીથી કોનો જગમાં ?
ભય અમારે કોનો ?
- રવીન્દ્રનાથ ઠાકુર
Monday, February 5, 2007
इतने ऊँचे उठो
इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है।
देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से
सिंचित करो धरा, समता की भाव वृष्टि से
जाति भेद की, धर्म-वेश की
काले गोरे रंग-द्वेष की
ज्वालाओं से जलते जग में
इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है॥
नये हाथ से, वर्तमान का रूप सँवारो
नयी तूलिका से चित्रों के रंग उभारो
नये राग को नूतन स्वर दो
भाषा को नूतन अक्षर दो
युग की नयी मूर्ति-रचना में
इतने मौलिक बनो कि जितना स्वयं सृजन है॥
लो अतीत से उतना ही जितना पोषक है
जीर्ण-शीर्ण का मोह मृत्यु का ही द्योतक है
तोड़ो बन्धन, रुके न चिन्तन
गति, जीवन का सत्य चिरन्तन
धारा के शाश्वत प्रवाह में
इतने गतिमय बनो कि जितना परिवर्तन है॥
चाह रहे हम इस धरती को स्वर्ग बनाना
अगर कहीं हो स्वर्ग, उसे धरती पर लाना
सूरज, चाँद, चाँदनी, तारे
सब हैं प्रतिपल साथ हमारे
दो कुरूप को रूप सलोना
इतने सुन्दर बनो कि जितना आकर्षण है॥
- द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
